विश्नोई संप्रदाय के बारे जानकारी

विश्नोई सम्प्रदाय Bishnoi

प्रवर्तक – सन्त जाम्भोजी

जन्म – पीपासर (नागौर) 1451 ई. भाद्र कृष्ण-8

पिता- लोहट जी पंवार

माता- हसा बाई

बच्चपन का नाम – धनराज

उपनाम – गूंगा गेला- पर्यावरण वैज्ञानिक

गुरु – गोरखनाथ

निर्वाण स्थल – लालासर (बीकानेर) 1536 ई

समाधी/पीठ- मुकाम तालवा बीकानेर

माता पिता की मृत्यु के बाद 1483 में जाम्भोजी ने घर त्याग दिया

1485 में समराथल, बीकानेर मे जाम्भोजी ने विश्नोई सम्प्रदाय की स्थापना की

विश्नोई सम्प्रदाय के लोग समराथल को पवित्र मानते हुए इसे धोक धोरा भी कहते है

जाम्भोजी के ग्रन्थ

1 विश्नोई प्रकाश
2 जम्भ सागर
3 जम्भ संहिता
4 120 शब्दवाणिया

जाम्भोजी सिकंदर लोदी के समकालीन थे इनके कहने पर लोदी ने गौ हत्या पर प्रतिबंधित किया गया

विशेषताएं :-
29 नियमो की पालना की जाती है
विष्णु निराकार, निर्गुण उपासना
सम्प्रदाय के लोग पर्यावरण प्रेमी होती है
मृत व्यक्ति के शव को दफनाते है
भेड़ बकरी नहीं पालते है
उपदेश स्थल को साथरी कहा जाता है
होली पर पाहल संस्कार का सम्बन्ध इस सम्प्रदाय से है
विभिन प्रकार के संस्कार सम्पन करने वाला व्यक्ति थापन कहलता है
गाने बजाने वाले को गायणा कहते है

प्रधान पीठ
मुकाम बीकानेर (मोक्ष धाम)

अन्य मेला

फल्गुन व् अश्विन माह की अमावस्या को

अन्य स्थल
रामड़ावास जोधपुर
जाम्भा फलोदी
जांगलू बीकानेर
लालासर बीकानेर
पींपासर नागौर
रोटू नागौर
लोदीपुर उत्तरप्रदेश