दयानन्द सस्स्वती का मेवाड़ का आगमन
1882-83 में मेवाड रहे
सज्जनसिहं ने इनको सज्जनगढ पैलेस में ठहराया
सज्जनगर में ही स्वामी जी ने सत्यार्थ प्रकाश के कुछ भाग की रचना की
स्वामी जी ने 1883 में सज्जनसिह की अध्यक्षता में
परोपकारीणी सभा की स्थापना की
वीर विनोद ग्रन्थ की रचना पूरी की,
कविराज की उपाधि



